• Call Us9472870642
  • Login

Teaching and learning activities resumed at SCS

Teaching and learning activities resumed at Scottish Central School - Date: 07 August 2021

Teaching and learning activities resumed at Scottish Central School keeping in mind the safety protocols of COVID 19. The school was opened with 50% attendance wearing masks and keeping in mind the social distance. Strict instructions were also given to follow the Corona guidelines. Along with this, special arrangements were made for thermal screening at the entry gate of the school.

There is a lot of happiness among the school management as well as the students and teachers regarding the commencement of classes.

Following the essential rules of COVID 19 by the school management, havan was also done for public welfare and environment sophistication, which would lead to convergence of values, concentration towards study and positive motivation.

 

Director Sunil Kumar Singh said that the school management has ensured that all the teachers and staff have been approved to come after getting the vaccine. For the sophistication of the environment, Havan-Yajna was also organized and said that the first microbiologist Dr. Haffkin has also done research on Yagya. He also found that the germs of diseases are killed by burning cow's ghee. Havan is not only an object of ritual, but it is also a versatile medical system.

Acharya Satyanand Shastri, the teacher of the school, explained the scientific importance of Havan and said that In a havan, wood, cow's ghee, havan material which is made of many types of herbs. A havan reduces the level of pollution by up to 70% in an area of ​​20 meters around it. Gases called "Formic aldehyde" are emitted from the Havan which destroys harmful bacteria.

A special type of sound waves emanated from the chanting of mantras in Sanskrit performed during the Havan. And they have a very deep effect on the gross body, the subtle world and the atmosphere.

 

On the other hand, confirming the engineering background, Manager Engg. Kumar Vikas said that in a yagyashala there are many shaped Havan Kunds. in which the fire is kindled. The shape of the pool is a device. in which there is fire. There is a call to all of this. After that, offerings are made through mantras. The components of the material are selected according to the type of Havan. When this action starts, then a process starts in the subtle also.

When 'Swaha' is uttered, the fire of the kund opens its mouth in which that Havan material is poured. Which goes to the dimension to which it is invoked. Energy descends from the same dimension which falls in a straight pool. From the kund spreads around it. This is the direct energy that affects everything that comes in contact with it and energizes it. This is how the work gets accomplished. The biological system is also strong. Which has direct and indirect impact.
 

Date: 07 August 2021


अरसे बाद लौटी विद्यालय परिसर में रौनक

स्कॉटिश सेंट्रल स्कूल में कोविड—19 के सुरक्षा प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए टीचिंग और लर्निंग एक्टिविटीज को फिर से शुरू किया गया। मास्क पहनकर और सोशल डिस्टेंस का ध्यान रखते हुए 50 फ़ीसदी उपस्थिति के साथ स्कूल खोला गया। कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की सख्त हिदायत भी दिया गया। इसके साथ ही स्कूल के इंट्री गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग की खास व्यवस्था भी की गई।

कक्षाओं के आरंभ होने को लेकर विद्यालय प्रबंधन के साथ ही विद्यार्थियों और शिक्षकों में काफी खुशी का माहौल है।

 विद्यालय प्रबंधन द्वारा कोविड-19 के जरूरी नियमों को अनिवार्य रूप से पालन करते हुए लोक कल्याण और वातावरण परिष्कार हेतु हवन भी कराया गया जिससे संस्कारों का अभिसिंचन, अध्ययन के प्रति एकाग्रता तथा सकारात्मक प्रेरणा मिले।

 

निदेशक सुनील कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा यह सुनिश्चित निर्देश दिया गया है कि सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को वैक्सीन लगवाकर आने की मंजूरी दी गई है। वातावरण के परिष्कार हेतु हवन–यज्ञ का भी आयेजन कराया और कहा कि पहले माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉक्टर हैफ़किन ने भी यज्ञ पर शोध किया है। उन्होंने भी पाया कि गाय का घी जलाने से रोगों के कीटाणु मर जाते हैं। हवन मात्र कर्मकांड की वस्तु नहीं है,अपितु बहुमुखी चिकित्सा पद्धति भी है।

विद्यालय के शिक्षक आचार्य सत्यानन्द शास्त्री ने हवन के वैज्ञानिक महत्व को समझाते हुए बताया कि - एक हवन में लकड़ियाँ , गाय का घी , हवन सामग्री जो कई प्रकार की जड़ी–बूटियों से मिलकर बनती है । एक हवन अपने आस पास के 20 मीटर के क्षेत्रफल के प्रदूषण के स्तर मे 70% तक कमी ला देता है । हवन में से "फार्मिक एल्डिहाइड" नामक गैसों का उत्सर्जन होता है जो हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कर देता है।

हवन के दौरान किए जाने वाले संस्कृत में मंत्रोच्चारण से एक विशेष प्रकार की ध्वनि तरंगे निकलती हैं। और उनका बहुत गहरा प्रभाव स्थूल शरीर, सूक्ष्म जगत और वायुमंडल पर पड़ता है।

 

वहीं दूसरी ओर इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि पर पुष्टि करते हुए प्रबंधक इंजी.० कुमार विकास ने कहा कि एक यज्ञशाला मे कई आकार के हवन कुंड होते है। जिनमे अग्नि प्रज्वलित होती है । कुण्ड का आकार एक यंत्र है । जिसमें अग्नि होती है। इन सब में एक आवाह्न होता है। उसके बाद मंत्रो से आहुतियाँ दी जाती है। हवन के प्रकार के अनुसार सामाग्री के घटक चुने जाते है। जब ये क्रिया शुरू होती है तब सूक्ष्म में भी एक क्रिया शुरू होती है।

जब ‘स्वाहा’ बोला जाता है कुण्ड की अग्नि अपना मुख खोलती है जिसमें वो हवन सामाग्री डाली जाती है। जो उस आयाम को जाती है जिसका आवाह्न किया है। उसी आयाम से ऊर्जा उतरती है जो सीधी कुण्ड मे गिरती है। कुण्ड से उसके चारो तरफ फैल जाती है। ये वो प्रत्यक्ष ऊर्जा होती है जो उसके संपर्क मे आने वाली हर चीज पर प्रभाव डाल कर उस को ऊर्जान्वित करती है । इसी से कार्य सिद्धि होती है। जैविक तंत्र भी पुष्ट होता है। जिसका प्रभाव प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ता है।